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Introduction of Palmistry


सबसे पहले बात करते हैं कि हस्त रेखा विज्ञान क्या है (Introduction of Palmistry)- Palmistry (पामिस्ट्री) या हस्त रेखा विज्ञान का मतलब 'हस्त सामुद्रिक' जो कि सामुद्रिक शास्त्र का एक खंड है। इस course में हम आपको सिखायेंगे कि कैसे आप हथेली की रेखाओं और हाथ की बनावट की सहायता से किसी व्यक्ति के स्वभाव (Nature), गुण-अवगुण और उसके भूत, वर्तमान और भविष्य आदि के बारे में जान सकते हैं। इसी विधि को हस्त रेखा परिक्षण और इसको हस्त सामुद्रिक या हस्त रेखा विज्ञान कहते हैं।


इसमें मुख्य रूप से दो बातों पर ध्यान दिया जाता है -

1. हाथ की बनावट कैसी है इसमें अंगुलियाँ,  अंगूठे,  हथेली और उन पर स्थित पर्वतों आदि को देखा जाता है।

2. हाथ की रेखाएं जिसमे अलग-अलग रेखाओं पर ध्यान दिया जाता है।

हस्त रेखा परीक्षण में इन दोनों बातों पर मुख्य रूप से ध्यान देना होता है। हाथ की बनावट से हम मुख्य रूप से व्यक्ति की मूल प्रवृत्तियों के बारे में जानते हैं और हथेली पर पायी जाने वाली रेखाओं से हमें व्यक्ति के वर्तमान, भूत और भविष्य के बारे में पता चलता है।

हस्त रेखा विज्ञान(Palmistry) में हस्त परीक्षण करने से पहले हस्तरेखा शास्त्री या हस्त रेखा परीक्षक (Palmist) को कुछ बातों का ध्यान विशेष रूप से रखना चाहिए जो निम्न हैं।


हस्त परीक्षक द्वारा परीक्षण के पहले ध्यान रखने योग्य बातें


1. हस्त-परीक्षण के शुरुवात में हाथों को न छुएँ (Touch), सिर्फ सामने वाले से हाथ को दिखाने का बोलें और दूर से ही देखें। अगर हाथ को स्पर्श(Touch) किये बिना ही आप उसको समझ सकते हैं तो स्पर्श न करें बहुत अधिक जरुरी होने पर ही सामने वाले व्यक्ति के हाथ को सामान्य रूप से उंगलियों की सहायता से छू सकते है।

2. सिर्फ उसी व्यक्ति का हाथ का परीक्षण करें जो इसके लिए उत्सुख या जिज्ञासु (curious) हो। अर्थात जो व्यक्ति इस पर विश्वास करता हो और अपने बारे में जानना चाहता हो।

3. हस्त परीक्षक के अन्दर आत्मविश्वास (Confidence) का होना अतिआवश्यक है और इस आत्मविश्वास के लिए आपको इस शास्त्र या हस्त रेखा विज्ञान के बारे में अच्छे से जानकारी (knowledge) होना जरुरी है।

4. सबसे पहले हथेली देखें, फिर करपृष्ठ (हथेली का पीछे का भाग) देखें और इसमें आपको सबसे पहले उस व्यक्ति के हाथ की बनावट देखना है जैसे उसके हाथ का आकार, अंगुलियाँ, नाखून और हथेली पर पाये जाने वाले पर्वत आदि कैसे हैं।

5. उस व्यक्ति के अंगूठे का परिक्षण भी बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि अंगूठा हमें बताता है कि उस व्यक्ति की इच्छाशक्ति (Willpower) और तर्कशक्ति (Rationality) कैसी है।

6. इसके साथ-साथ हथेली पर पाए जाने वाले अलग अलग चिन्हों पर भी विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए क्योंकि इनका असर पर्वतों और रेखाओं और उन रेखाओं के गुणों पर पड़ता है।

7. कभी भी कोई भविष्यवाणी न करें या कोई ऐसी बात न बोलें कि ऐसे हैं सिर्फ संभावनाएं बताइए आप ये कहिये कि ऐसा होना संभव है या ऐसा हो सकता है या आपके हाथ की रेखायें ये दर्शाती हैं।


इन सभी बातों का ध्यान एक हस्त परीक्षक को रखना चाहिए और इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए हाथों का अच्छे से निरीक्षण करें और आत्मविश्वास के साथ फलादेश(परिणाम या result) कहना चाहिए। 


"अधूरा ज्ञान, अज्ञान से ज्यादा नुकसानदायक होता है!"